28-June-2022

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Bihar Diwas 2022: बिहार दिवस पर पटना में भव्य आयोजन, कैलाश खेर, रेखा भारद्वाज-सुखविंदर बांधेंगे समां, 22 मार्च से कार्यक्रम

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न्यूज़ डेस्क: 22 मार्च 2022 को बिहार दिवस (Bihar Diwas 2022) के रूप में मनाया जा रहा है. इसी दिन बिहार की स्थापना हुई है. अपना बिहार गौरवशाली बिहार 110 साल का हो रहा है. बिहार दिवस के मौके पर सरकार की ओर से भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. जिसकी तैयारी लगभग पूरी हो गई है. बिहार दिवस के मौके पर राजधानी पटना के गांधी मैदान में तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. 22 मार्च से तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम का उद्घाटन सीएम नीतीश कुमार करेंगे. जबकि 24 मार्च को समापन समारोह में राज्यपाल फागू चौहान शामिल होंगे. बिहार के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने इसकी जानकारी दी है.

बिहार दिवस पर 22-24 मार्च तक कई कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा. वहीं लेजर शो के माध्यम से बिहार के बारे में जानकारी दी जाएगी. इस मौके पर पुस्तक मेले का भी आयोजन होगा. वहीं उद्घाटन सत्र में ड्रोन का कतरब गांधी मैदान में देखने लायक होगा. 400-500 ड्रोन अपना कतरब दिखाएंगे. मशहूर सिंगर कैलाश खेर, रेखा भारद्वाज और सुखविंदर सिंह अपने गायन से समां बांधेंगे जबकि एसकेएम में मेहमूद फारुखी कर्ण कथा सुनाएंगे जबकि अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन को गजल गाते सकेंगे, वहीं ठुमरी गाने सुरेन्द्र शर्मा आएंगे. 22 मार्च को कैलाश खेर , 23 मार्च को रेखा भारद्वाज और 24 मार्च को सुखविंदर सिंह का कार्यक्रम होगा.

पिछले दो साल से कोरोना महामारी के कारण बिहार दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो पा रहा था. लेकिन इस स्थिति सामान्य होने पर पूरे धूमधाम से बिहार दिवस मनाने की तैयारी की जा रही है. इस मौके पर स्थानीय से लेकर कई नामी कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे. दर्शकों के लिए भी बेहतर इंतजाम किए गए हैं और इस बार बड़ी तादाद में दर्शकों के लिए व्यवस्था की जा रही है. बिहार दिवस कार्यक्रम जल जीवन हरियाली और नल जल योजना के थीम पर होगा.

बता दें कि बिहार के गौरव की बात करें तो सीतामढ़ी के ‘लखनदेई नदी’ के तट पर स्थित इस सांस्कृतिक मिथिला क्षेत्र को ‘सीता’ की जन्मस्थली माना जाता है. सम्पूर्ण देश से पर्यटक बिहार के इस पावन स्थल का भ्रमण करने आते हैं. वहीं ‘लिट्टी चोखा’ बिहार का लोकप्रिय व्यंजन है. इसमें सत्तू भरी लिट्टी को आग पर सेंक कर बैंगन से बने चोखे के साथ परोसा जाता है. देश के प्रधानमंत्री भी ‘लिट्टी चोखा’ के मुरीद हैं. बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया का सबसे प्राचीन और समृद्ध शिक्षा का केंद्र था. नालंदा पुस्तकालय ‘रत्नरंजक’,’रत्नोदधि’ एवं ‘रत्नसागर’ नामक तीन विशाल भवनों में स्थित था. बिहार के बोधगया में मौजूद महाबोधि मंदिर एक पवित्र स्थल है जिसे ‘महान जागृति मंदिर’के नाम से भी जाना जाता है. बोधगया वही स्थल है, जहां गौतम बुद्ध को आत्म-ज्ञान की प्राप्ति हुई थी.