29-September-2022

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Shravani Mela 2022: कल से शुरू हो रहा है सावन, कांवड़ि‍यों के लिए मोबाइल एप लॉन्‍च, खानपान से लेकर शौचालय तक की मिलेगी जानकारी

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Shravani Mela 2022: कोरोना काल के बाद इस साल पहली बार श्रावणी मेला का आयोजन हो रहा है. 14 जुलाई से सावन का पावन महीना शुरू हो रहा है, जो 12 अगस्त तक चलेगा. इस साल बड़ी तादाद में श्रद्धालु बाबा वैद्यनाथ धाम का दर्शन-पूजन करने आ सकते हैं. श्रद्धालु भागलपुर जिले के सुल्‍तानगंज से गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा धाम तक की पैदल यात्रा करते हैं और वहां पहुंचकर भगवान शिव पर जलार्पण करते हैं. ऐसे में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए बिहार और झारखंड की सरकार ने व्‍यापक पैमाने पर तैयारी करने का दावा किया है. वहीं इस बार प्रशासन ने बाबा वैद्यनाथ के दर्शन पूजन में कई बड़े बदलाव किए हैं. इसी क्रम में बिहार सरकार ने कांवड़ियों की सुविधा के लिए ‘कांवड़ यात्रा 2022’ के नाम से एक खास मोबाइल एप लॉन्‍च किया है. इस मोबाइल एप पर कांवड़ियों के काम की सभी सूचनाएं और जानकारियां उपलब्‍ध रहेंगी. कांवड़िया इस एप को अपने स्‍मार्टफोन पर डाउनलोड कर खानपान से लेकर शौचालय के बारे में जानकारी ले सकते हैं.

बिहार के पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद ने कांवड़ यात्रा 2022 ऐप को लांच किया. उन्होंने कहा कि पिछले 2 वर्षों से कोरोना के कारण लोग बाबा भोलेनाथ का दर्शन नहीं कर पा रहे थे, लेकिन इस बार लाखों की संख्या में लोग कांवड़ यात्रा में शामिल होंगे. उन्होंने बताया कि मोबाइल एप से कांवड़ियों को तमाम सुविधाएं मिलेंगी. कांवड़ यात्रा ऐप 2022 ऐप को अपने मोबाइल में इंस्टॉल करते ही आपको कांवड़ यात्रा से जुड़ी तमाम जानकारियां मिलने लगेंगी. ऐप में कावड़िया पथ, सहायता केंद्र, बाबा धाम कैसे पहुंचे, कंट्रोल रूम, धर्मशाला, पुलिस शिविर, शौचालय एवं स्नानागार, पेयजल सुविधा, मेले का इतिहास समेत तमाम जानकारियां मौजूद हैं.

बता दें कि इस बार श्रावणी मेला 14 जुलाई से 12 अगस्त तक चलेगा. 13 जुलाई की शाम को बाबा की आरती के बाद मंदिर की व्यवस्था पूरी तरह बदल जाएगी. कांवरिया भक्तों की भीड़ गुरुवार को सावन के पहले दिन से लगनी शुरु हो जाएगी, इसे लेकर बुधवार की रात को स्पर्श पूजा पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी. 14 जुलाई से बाबा मंदिर में जलाभिषेक जलपात्र से होगा. बाबा के गर्भ गृह के बाद 100 मीटर की दूरी पर एक जलपात्र लगाया जाएगा, जहां से भक्तों का जल बाबा पर अर्पित हो जाएगा. भक्तों का गर्भ गृह में प्रवेश नहीं होगा. केवल डाक बम ही मंदिर के अंदर बाबा पर जलाभिषेक और स्पर्श पूजा का अवसर पाएंगे.