01-December-2022

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Bihar: अपनी लाडली बेटी को खोने वाले पिता बने मसीहा, अंगदान कर चार लोगों को दी नई जिंदगी

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LAKHISARAI: बिहार (Bihar) के लखीसराय (Lakhisarai) के रहने वाले एक परिवार ने अपनी 15 साल की लाढ़ली बेटी को तो खो दिया लेकिन बेटी के अंगदान (Organ Donation) कर के उन्होंने 4 लोगों को नई जिंदगी दे दी. जी, हां बिहार के लखीसराय का एक परिवार रोजी रोटी की तलाश में चंडीगढ़ आया था, पेट पालने के लिए पिता मजदूरी का काम करते थे, लेकिन इसी बीच उनकी 15 साल की बेटी ब्रेन डेड (Brain Dead) हो गई. परिजनों ने अपनी बेटी को तो खो दिया लेकिन बेटी के अंगदान कर उन्होंने चार लोगों को नई जिंदगी दे दी.

बच्ची के अंगदान से चार लोगों को मिली जिंदगी

उसके पिता ने अपनी बेटी का हार्ट, लिवर, किडनी, पेनक्रियाज और दोनों कॉर्निया दान कर दिए. बच्ची के हार्ट का राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल में पहली बार हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ. आरएमएल अस्पताल में पहली बार हार्ट ट्रांसप्लांट हुआ है. इसके लिए अस्पताल ने एम्स के कार्डिएक थोरासिक सर्जन मिलिंद होते व उनकी टीम का सहयोग लिया.

नेशनल ऑर्गन टिशू एंड ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (NOTTO) के अनुसार लखीसराय के एक मजदूर की 15 साल की बेटी ब्रेन डेड हो गई थी, बच्ची का इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा था, लेकिन 21 अगस्त को अस्पताल ने बच्ची को ब्रेड डेड घोषित कर दिया और इसकी सूचना दिल्ली स्थित नोटो मुख्यालय को दी गई. नोटो ने हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए आरएमएल अस्पताल को एलोकेट किया और बाकी अंग चंडीगढ़ पीजीआई को ही दे दिए.

रात 3 बजे आरएमएल अस्पताल में हुआ हार्ट ट्रांसप्लांट

आरएमएल अस्पताल के कार्डिएक थोरासिस सर्जन डॉ. नरेंद्र सिंह झाजरिया ने बताया कि हम सड़क मार्ग से रविवार को हार्ट लेकर निकले थे, शाम 6 बजे हमने बच्ची के शरीर से हार्ट निकाला और वहां से निकल गए. ट्रैफिक पुलिस ने हमें ग्रीन कॉरिडोर की सुविधा दी और दिल्ली एयरपोर्ट से आरएमएल तक के लिए बी हमें पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर दिया. शाम 8 बजकर 30 मिनट पर हम चंडीगढ़ से चले थे और रात 10 बजे हम ऑपरेशन थिएटर में थे. रात 3 बजे हार्ट ट्रांसप्लांट किया गया.